लोहा चोरी के नाम पर सियासत का ऐसा खेला खेल…खुद मजाक बनकर रह गए विधायक जी।
रायपुर/ भिलाई के वैशाली नगर से भाजपा विधायक रिकेश सेन पिछले कुछ महीनों से बीएसपी में कथित हजारों करोड़ की लोहा चोरी को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं। कभी 10 हजार करोड़ की चोरी का दावा, कभी करोड़ों के लेनदेन के आरोप और कभी पुलिस तथा बीएसपी प्रबंधन पर सवाल करते वीडियो रील में दिखते है लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद उन्होंने अब तक अपने दावों के पीछे के ठोस दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए। मामला इतना आगे बढ़ चुका है कि अब यह सवाल भाजपा के भीतर भी उठने लगा है कि आखिर विधायक कहना क्या चाहते हैं और उनके पास प्रमाण क्या हैं? उनके इन दावों को भयादोहन की दृष्टि से भी देखा जा रहा है।
देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। भिलाई जैसी इस्पात नगरी में भाजपा का विधायक है और उसी भाजपा सरकार की पुलिस तथा प्रशासन पर विधायक लगातार उंगली उठा रहे हैं। यदि विधायक के आरोप सही हैं तो सरकार को तत्काल निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को सामने लाना चाहिए और यदि आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो संगठन को भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। लेकिन महीनों से आरोपों की चल रही यह दनादन राजनीति सरकार तथा संगठन की खामोशी सवालों को और बड़ा कर रही है।
बीएसपी में चोरी का मामला निश्चित रूप से गंभीर है और पुलिस ने संदिग्ध लौह सामग्री की बरामदगी तथा गिरफ्तारियों के जरिए जांच भी शुरू की है। वैसे यह निरंतर प्रक्रिया है। इतने बड़े प्लांट में छोटी बड़ी चोरी हम दशकों से सुनते आए है।
परंतु अगर विधायक के पास यदि 10 हजार करोड़ की चोरी, 25 करोड़ के कथित लेनदेन या किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ी जानकारी है तो उसे सार्वजनिक जांच एजेंसियों को सौंपना चाहिए। आखिर किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के पास इतनी महत्वपूर्ण जानकारी है तो वह उसे इशारों में क्यों रखे? किसने चोरी की, किसके संरक्षण में हुई, पैसा कहां गया और कौन लोग इसमें शामिल हैं इन सवालों के जवाब जनता जानना चाहती है।
रिकेश सेन द्वारा लगातार उठाए जाने के बाद मामला अब केवल बीएसपी की चोरी का नहीं रह गया है। जिस तरह विधायक लगातार अपनी ही सरकार की पुलिस, प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रहे हैं, उससे अनजाने में वही सरकार कटघरे में खड़ी होती दिखाई दे रही है जिसके वे विधायक हैं। विपक्ष को सरकार घेरने के लिए इससे बेहतर मौका और क्या चाहिए कि सत्ता पक्ष का ही एक विधायक अपनी सरकार की व्यवस्था पर लगातार गंभीर सवाल उठाता रहे।
और यहां सबसे दिलचस्प बात यह भी है कि जब अपनी ही पार्टी और सत्ता के भीतर से रिकेश को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला तो उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं भूपेश बघेल और चरणदास महंत तक से समर्थन जुटाने की बात कह डाली। लेकिन वहां से भी उन्हें वह राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं मिली जिसकी शायद उन्हें उम्मीद थी। परिणाम यह है कि वे एक तरफ आरोप लगाते जा रहे हैं और दूसरी तरफ धीरे-धीरे राजनीतिक रूप से अकेले पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा के लिए यह स्थिति निश्चित रूप से असहज करने वाली है। क्योंकि विधायक की लड़ाई यदि वास्तव में भ्रष्टाचार और चोरी के खिलाफ है तो पार्टी को उनके साथ खड़ा होना चाहिए और जांच को आगे बढ़ाना चाहिए। लेकिन यदि आरोप केवल राजनीतिक दबाव बनाने या किसी को डराने-धमकाने की शैली में लगाए जा रहे हैं तो संगठन को भी हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। किसी विधायक की व्यक्तिगत बयानबाजी इतनी लंबी नहीं होनी चाहिए कि उससे पूरी सरकार और संगठन की छवि प्रभावित होने लगे।
रिकेश सेन को भी अब तय करना होगा कि वे आरोपों की राजनीति करेंगे या प्रमाणों की। जनता को संकेतों में कही गई कहानियां नहीं चाहिएं। जनता जानना चाहती है कि 10 हजार करोड़ की कथित चोरी का हिसाब कहां है, 25 करोड़ के कथित लेनदेन का प्रमाण क्या है और यदि उन्हें सब कुछ पता है तो वे बाते सार्वजनिक क्यों नहीं करते?
फिर सवाल उठता है कि भाजपा का एक विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ इतने गंभीर आरोप लगा रहा है और सरकार तथा संगठन दोनों चुप क्यों हैं।
इशारों, रहस्य और सनसनी के सहारे भाजपा विधायक रिकेश की राजनीति चलती रहे, यह न भिलाई की जनता, भाजपा और सरकार किसी हित में नहीं है।
@देवेंद्र किशोर गुप्ता