पांच नए मेडिकल कॉलेज, बढ़े अवसर! अब डोमिसाइल की सख्त जांच जरूरी
रायपुर/ छत्तीसगढ़ में NEET UG 2026 की राज्य मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद मेडिकल प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच एक शंका चर्चा में है। उनका सवाल यह है कि दूसरे राज्यों के ऐसे विद्यार्थी, जिन्होंने गलत तरीके से छत्तीसगढ़ का डोमिसाइल हासिल कर रखा है, वे राज्य के स्थानीय विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों को प्रभावित तो नहीं कर रहे हैं? यह अभी कोई प्रमाणित आरोप नहीं है, लेकिन ऐसी शंका सामने आई है तो इसकी निष्पक्ष और गहन जांच होना जरूरी है। बीते दौर में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी है।
छत्तीसगढ़ की Round-1 मेरिट लिस्ट में कुल 9,195 अभ्यर्थी हैं, जिनमें 6,834 का CG Domicile “Yes” और 2,361 का “No” दर्ज है। हालांकि केवल गैर-डोमिसाइल अभ्यर्थियों के मेरिट लिस्ट में होने से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि उन्होंने सरकारी सीटें हासिल कर ली हैं, क्योंकि ऐसे अभ्यर्थियों के सामने Private Quota जैसी श्रेणियां भी दर्ज हैं। लेकिन जिन अभ्यर्थियों को राज्य कोटे के लिए पात्र माना जा रहा है, उनके डोमिसाइल दस्तावेजों का सत्यापन कितना गहरा है, यह सवाल जरूर महत्वपूर्ण है। क्या प्रमाण-पत्र नियमानुसार बने हैं? क्या दस्तावेजों की पर्याप्त जांच हुई है? और यदि किसी डोमिसाइल पर शिकायत या आपत्ति आती है तो उसकी जांच की कोई मजबूत व्यवस्था है? सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
निसंदेह, छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। खास तौर पर एक ही समय में पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिलना और 250 नई MBBS सीटों का जुड़ना प्रदेश और उनके स्वयं के लिए बड़ी उपलब्धि है। गीदम, कुनकुरी, मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम में नए कॉलेज शुरू होने से उन इलाकों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र के नजदीक मेडिकल शिक्षा का अवसर मिलेगा।
यही वजह है कि स्वास्थ्य मंत्री से अपेक्षा भी बड़ी है। मेडिकल कॉलेज खोलना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इन कॉलेजों में प्रवेश की व्यवस्था ऐसी हो कि पात्र छत्तीसगढ़ी विद्यार्थी अपने अधिकार से वंचित न हों, यह सुनिश्चित करना उससे भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। डोमिसाइल को लेकर यदि कहीं कोई संदेह है तो उसकी जांच कराकर व्यवस्था को पहले ही दुरुस्त कर देना चाहिए। जिनके दस्तावेज सही हैं, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और यदि कहीं फर्जीवाड़ा या गलत जानकारी सामने आती है तो कार्रवाई भी समय रहते होनी चाहिए।
आज छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ रही है, सीटें बढ़ रही हैं और सरकार चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर काम कर रही है। ऐसे में प्रदेश के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की यह अपेक्षा पूरी तरह स्वाभाविक है कि इन बढ़ते अवसरों में छत्तीसगढ़ के बच्चों के हित की भी पूरी गारंटी हो।
सरकार यदि हर राउंड के बाद यह सार्वजनिक कर दे कि कितने स्थानीय डोमिसाइल विद्यार्थियों को सरकारी MBBS सीट मिली, कितने गैर-डोमिसाइल विद्यार्थियों को किस कोटे में प्रवेश मिला और राज्य कोटे के लिए प्रस्तुत डोमिसाइल प्रमाण-पत्रों का किस स्तर पर सत्यापन हुआ, तो इस तरह की तमाम शंकाओं का स्थायी समाधान हो सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलकर रास्ता बनाया है। अब जरूरत है कि उसी दृढ़ता से प्रवेश व्यवस्था को भी इतना पारदर्शी और मजबूत बनाया जाए कि कोई अपात्र व्यक्ति स्थानीय विद्यार्थी का अवसर न ले सके।
क्योंकि सवाल किसी दूसरे राज्य के विद्यार्थी के खिलाफ नहीं है। सवाल सिर्फ इतना है कि छत्तीसगढ़ में खुल रहे मेडिकल कॉलेजों और बढ़ रही MBBS सीटों में छत्तीसगढ़ के मेहनती विद्यार्थियों के हित सुरक्षित रहें।
कॉलेज बढ़े हैं, सीटें बढ़ी हैं,अब भरोसा भी बढ़ना चाहिए।और वह भरोसा तभी बढ़ेगा, जब हर डोमिसाइल की जांच हो, हर सीट का हिसाब साफ हो और छत्तीसगढ़ के बच्चों के हक की पूरी गारंटी हो।
इस संबंध में JDA रायपुर अध्यक्ष डॉ. पियूष पी. श्रीवास्तव ने कहा कि एक तरफ सवाल उठ रहा है कि क्या दूसरे राज्यों के कुछ विद्यार्थी गलत या फर्जी डोमिसाइल के जरिए छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों का हक प्रभावित कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ बाहर से आए डॉक्टरों के दस्तावेज, योग्यता और रजिस्ट्रेशन के सत्यापन को लेकर भी सवाल हैं।
हम किसी दूसरे राज्य के विद्यार्थी या डॉक्टर के खिलाफ नहीं हैं। सवाल केवल व्यवस्था की पारदर्शिता और छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों व डॉक्टरों के अधिकारों का है। डोमिसाइल में गड़बड़ी की आशंका है तो उसकी गहन जांच हो और बाहर से आने वाले डॉक्टरों की योग्यता, रजिस्ट्रेशन व दस्तावेजों का अनिवार्य सत्यापन किया जाए।
छत्तीसगढ़ के बच्चों की मेडिकल सीट और यहां के डॉक्टरों के रोजगार दोनों के अधिकारों से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहां कि स्वास्थ्य मंत्री ने नए मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ाकर बड़ी पहल की है। अब उसी दृढ़ता से प्रवेश और नियुक्ति व्यवस्था को भी पारदर्शी पारदर्शी बनाना छत्तीसगढ़ियों के हित में होगा।