“अनुशासन का पाठ कौन पढ़ाए,
जब PSO ही मर्यादा भूल जाए!”
रायपुर/ सियासत भी गजब का खेल है! पूर्व राष्ट्रीय नेत्री की राजनीति भले ही ढलान पर हो, लेकिन उनके PSO के तेवर अब भी सातवें आसमान पर हैं। चर्चा है कि साहब अपने ठेकेदारी के काम को लेकर एक जिला भाजपा अध्यक्ष तक से उलझ चुके हैं। अध्यक्ष जी ने नेत्री की लाज रखी, विवाद नहीं बढ़ाया, लेकिन बातचीत जरूर बंद कर दी।
हद तो तब हो गई, जब कथित तौर पर ठेकेदारी के मामले में PSO साहब कलेक्टर से ही भिड़ गए और बदजुबानी करने लगे। उस वक्त चैंबर में प्रदेश से आए अधिकारी भी मौजूद थे। आखिरकार कलेक्टर को ‘गेट आउट’ कहना पड़ा।
आपको बता दे कि जिला अध्यक्ष वाली घटना हाल ही की है जबकि कलेक्टर वाली घटना थोड़ी पुरानी। जिला अध्यक्ष वाली घटना की खुदाई के दौरान कलेक्टर वाली जानकारी सामने आई है।
हालांकि उक्त मामले को कलेक्टर और जिला भाजपा अध्यक्ष दोनों ने तूल नहीं दिया, लेकिन सवाल तो उठेंगे ही! और रॉ फाइल जानकारी में आई हुई बात यथा स्थित पाठकों तक न पहुंचाए ऐसा कैसे हो सकता है।
आखिर PSO साहब को इतनी ताकत कहां से मिल रही है? सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली है या ठेकेदारी का रुतबा दिखाने का लाइसेंस?
राजनीति में वक्त बदलते देर नहीं लगती। ऐसे समय में समर्थकों का संयम ही नेता की प्रतिष्ठा बचाता है। वरना विरोधियों को कुछ करने की जरूरत ही क्या है, जब अपने ही नुकसान करने पर आमादा हों!