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छत्तीसगढ़ गठन के 26 साल बाद पहले शासकीय होम्योपैथी कॉलेज की राह खुली, 63 सीटों पर प्रवेश की अनुमति

“स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से छत्तीसगढ़ में शासकीय होम्योपैथी महाविद्यालय की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग से 63 सीटों पर प्रवेश की सशर्त अनुमति मिलना प्रदेश के युवाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर खोलने वाला कदम है। यह पहल आयुष शिक्षा के विस्तार और राज्य में चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

रायपुर, 12 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयत्नों से महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। नवा रायपुर स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ होम्योपैथी को राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH), नई दिल्ली के चिकित्सा आकलन एवं रेटिंग बोर्ड (MARBH) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) पाठ्यक्रम की 63 सीटों पर प्रवेश की सशर्त अनुमति प्रदान की है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से जुड़ी इस पहल को प्रदेश में शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्य गठन के करीब 26 साल बाद शासकीय क्षेत्र में होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा का नया अवसर खुलने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में होम्योपैथी की पढ़ाई पहले से निजी संस्थान में संचालित है, लेकिन शासकीय महाविद्यालय की शुरुआत से विद्यार्थियों को सरकारी संस्थान में भी इस पाठ्यक्रम का विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को जारी अनुमति-पत्र के अनुसार, नवा रायपुर के सेक्टर-40, उपरवारा, अटल नगर स्थित महाविद्यालय को 63 सीटों की प्रवेश क्षमता के साथ बीएचएमएस पाठ्यक्रम शुरू करने की सशर्त अनुमति दी गई है। प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में अर्हता प्राप्त करना अनिवार्य होगा। कुल स्वीकृत सीटों में न्यूनतम 15 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटे के अंतर्गत रहेंगी, जबकि शेष 85 प्रतिशत सीटों पर संबंधित राज्य अथवा केंद्रशासित प्रदेश की सक्षम काउंसलिंग संस्था नियमानुसार प्रवेश प्रक्रिया संचालित करेगी।
स्वीकृत प्रवेश क्षमता में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की सीटें भी शामिल हैं। महाविद्यालय की स्थापना और पाठ्यक्रम शुरू करने के आवेदन की जांच के दौरान आयोग के चिकित्सा आकलन एवं रेटिंग बोर्ड ने 21 और 22 जुलाई 2026 को संस्थान का निरीक्षण किया था। इसके बाद 7 सितंबर 2026 को सुनवाई का अवसर दिया गया। निरीक्षण रिपोर्ट, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तुत अनुपालन विवरण की समीक्षा के बाद 12 अक्टूबर को सशर्त अनुमति जारी की गई।
आयोग ने आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति एवं पंजीकरण सहित निर्धारित कमियों को 30 दिनों के भीतर दूर करने और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अस्पताल को भी निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्यशील बनाना होगा।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से जुड़ी यह पहल प्रदेश में आयुष चिकित्सा शिक्षा के संस्थागत विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे होम्योपैथी में स्नातक की पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को राज्य में एक अतिरिक्त शैक्षणिक विकल्प मिलेगा। साथ ही, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, प्रयोगशालाओं के विकास, अस्पताल की सुविधाओं और व्यावहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था को मजबूत करने का अवसर भी बनेगा। हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता महाविद्यालय में सभी निर्धारित शर्तों के समयबद्ध अनुपालन और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक एवं चिकित्सालयीन सुविधाओं के विकास पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, नवा रायपुर के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ होम्योपैथी को 63 सीटों पर प्रवेश की सशर्त अनुमति मिलना छत्तीसगढ़ में शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से जुड़ी यह पहल प्रदेश के युवाओं के लिए नए अवसर खोल सकती है। अब महाविद्यालय के सामने आयोग की निर्धारित शर्तों को पूरा कर शिक्षा और प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था विकसित करने की जिम्मेदारी है।


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