रायपुर/ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के बीच कथित 1500 करोड़ लेनदेन वाला एक फर्जी वीडियो वायरल हुआ था। उसे बनाने वाले बीजेपी संगठन से जुड़े लोग ही बताए जा रहे है। जो आज छत्तीसगढ़ पुलिस की गिरफ्त में है।
सूत्र बताते है कि दिल्ली से निर्देश के बाद सप्ताह भर पहले ये गिरफ्तारी देश के तेजतर्रार पुलिस अफसरों में एक छत्तीसगढ़ में पदस्थ आईजी अमरेश मिश्रा की निगरानी में हुई। पर सत्ताधारी दल के भीतर हुए इस पूरे घटनाक्रम पर न कोई चर्चा न मीडिया में उस कोई चर्चा। एकदम सन्नाटा छाया हुआ है।
छत्तीसगढ़ में भाजपा सत्ता और संगठन में जो कुछ चल रहा है उस पर जिम्मेदारों का मौन रहना भी बताता है कि कितनी शून्यता यहां आ गई है। जबकि होना ये चाहिए था कि संगठन के नाव में छेद करने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए, एक नोटिस तो दिया जा सकता था। इतने बड़े घटनाक्रम के बाद अगर सब कुछ स्मूथ चल रहा है इसका मतलब दाल में काला नहीं है पूरी दाल ही काली है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के खिलाफ षडयंत्र रचने वालों को अनजाने में क्या संगठन महामंत्री पवन साय का संरक्षण है? क्योंकि जितने चेहरे बेनकाब हुए हैं सारे उनके ही इर्द-गिर्द के हैं और मंत्रियों और अफसरों से बात करने के माध्यम भी।
जल्दी इस विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट रॉ फाइल में पढ़ने को मिलेगा। जब तक आप इस क्रिएटिव को देखिए और खेल को समझिए।
नोट : वीडियो को फर्जी इसलिए कहा क्योंकि उक्त राशि में एक शून्य कम रहता तो विश्वास किया भी जा सकता था।1500 करोड़ राशि छत्तीसगढ़ से तो संभव नहीं है।