रायपुर/ छत्तीसगढ़ की राजनीति में कभी-कभी एक पत्र पूरे दौर की कहानी कह देता है। आज ऐसा ही एक पत्र चर्चा में है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को पक्का मकान दिलाने और भाजपा के चुनावी वादे को पूरा करने के लिए धन्यवाद दिया है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि भाजपा ने “मोर आवास-मोर अधिकार” आंदोलन के दौरान जो संकल्प लिया था, उसे विष्णुदेव साय सरकार ने पूरा किया और लाखों गरीबों के सिर पर छत पहुंचाने का काम किया। 
ऐसा प्रतीत होता है कि यह पत्र केवल औपचारिक धन्यवाद नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति का प्रतीक है, जिसमें सरकार के भीतर समन्वय, सामूहिक जिम्मेदारी और नेतृत्व के प्रति सम्मान दिखाई देता है। एक विभागीय मंत्री अपनी उपलब्धि का श्रेय स्वयं लेने के बजाय मुख्यमंत्री और पूरी सरकार को दे रहा है। यह संदेश देता है कि सरकार में लक्ष्य व्यक्तिगत प्रचार नहीं, बल्कि जनहित के वादों को पूरा करना है। 
इसके ठीक विपरीत, छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2022 में एक दूसरा पत्र भी देखा था। तब कांग्रेस सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए राशि नहीं मिलने की शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि बार-बार अनुरोध के बावजूद आवास योजना के लिए धन नहीं मिला, जिसके कारण लगभग 8 लाख लोगों को आवास नहीं मिल सका। इतना ही नहीं, उन्होंने विभाग छोड़ दिया, लेकिन मंत्री पद पर बने रहे। 
उस समय पूरे देश में यह खबर कांग्रेस सरकार के भीतर चल रही खींचतान और टकराव के रूप में देखी गई। राष्ट्रीय मीडिया ने इसे मुख्यमंत्री और सिंहदेव के बीच लंबे समय से चल रहे शक्ति संघर्ष का परिणाम बताया था।
आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। विजय शर्मा अपने पत्र में लिखते हैं कि भाजपा सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में ही लंबित आवासों को पूरा करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि राज्य में दो वर्षों के भीतर 10.60 लाख से अधिक आवास पूरे किए गए और छत्तीसगढ़ आवास निर्माण में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ।
यही नहीं, “मोर आवास-मोर अधिकार” आंदोलन, जो कभी कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा के संघर्ष का प्रतीक था, आज उसी आंदोलन के संकल्प को पूरा करने की कहानी बन चुका है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि पिछली सरकार में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर गंभीर बाधाएं थीं, जबकि वर्तमान सरकार ने आवास निर्माण की गति तेज की है।
राजनीति में मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन सरकार की असली ताकत तब दिखती है जब मंत्री और मुख्यमंत्री एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय एक लक्ष्य के लिए मिलकर काम करें। एक तरफ वह दौर था जब मंत्री अपने ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर व्यवस्था पर सवाल उठा रहा था। दूसरी तरफ आज का दौर है, जब उपमुख्यमंत्री मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जनता से किए गए वादे पूरे करने के लिए धन्यवाद दे रहा है।
छत्तीसगढ़ की जनता भी इन दोनों तस्वीरों को देख रही है। एक तस्वीर में शिकायत, असंतोष और टकराव है। दूसरी तस्वीर में समन्वय, सम्मान और परिणाम हैं। और शायद यही कारण है कि आज भाजपा सरकार अपने कामों के साथ-साथ अपनी कार्यशैली को भी एक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर पा रही है।
कांग्रेस शासन में आवास योजना पर पत्र शिकायत का था, भाजपा शासन में वही पत्र धन्यवाद का है। यही दो राजनीतिक संस्कृतियों के बीच का सबसे बड़ा अंतर है।