“एक अफसर के कमीशनखोरी के आगे टूट गया ठेकेदार”
रायपुर/ बात छत्तीसगढ़ के उस प्रशासनिक तंत्र की, जो अब केवल ‘भ्रष्ट’ नहीं, बल्कि क्रूर हो चुका है। रायपुर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अफसरों और ठेकेदारों की एक समीक्षा बैठक हुई। जहाँ फाइलों के बीच एक ठेकेदार की सिसकियाँ भी गूँजीं। उस ठेकेदार ने जब ये कहा कि ‘मेरे बाल-बच्चे नहीं होते तो मैं आत्महत्या कर लेता’ तो बैठा हर व्यक्ति सन्न रह गया।
सीईओ,ईएनसी, एसई और बड़े अधिकारियों के सामने उस ठेकेदार ने जो खुलासा किया, वो रोंगटे खड़े करने वाला था। ठेकेदार का आरोप था कि एक अधिकारी प्रति किलोमीटर सड़क निर्माण के बदले 5 लाख रुपये या 5 फीसदी अतिरिक्त कमीशन मांग रहे हैं। ये वही अधिकारी हैं जो दफ्तर में बैठकर विकास का दावा करते हैं, लेकिन असल में ये विकास के नाम पर ‘दीमक’ बन चुके हैं जो ठेकेदारों को अंदर तक खोखला कर रहे हैं।
ठेकेदार की बेबसी देखिए, वो कहता है कि अधिकारी ‘वर्ग विशेष’ से आते हैं, इसलिए शिकायत करने पर उल्टा उसी पर गाज गिर जाएगी। ये डर इत्तेफाक नहीं, बल्कि इन भ्रष्ट अफसरों द्वारा फैलाई गई दहशत है। इन्हें पता है कि नेता की आड़ में इनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। ये पर्दे के पीछे से वो खेल खेल रहे हैं। जहाँ न इन्हें चुनाव का डर है और न ही जनता की नाराजगी का। इनकी नजर सिर्फ और सिर्फ उस ‘कमीशन’ पर है, जो ये सड़कों की मजबूती को बेचकर वसूल रहे हैं।
सबसे शर्मनाक बात ये है कि ये सब उस बैठक में हुआ जहाँ प्रमुख अभियंता और बड़े-बड़े अफसर मौजूद थे। खुद वह अधिकारी भी मौजूद था जिस पर आरोप लगाया गया। सबने सुना, सबने देखा, लेकिन किसी की आत्मा नहीं जागी! किसी अफसर ने उस ठेकेदार को आश्वासन नहीं दिया न ही दिलासा दिलाई। बस उठकर चल दिए। क्या इन अधिकारियों के लिए ठेकेदार की जान की कोई कीमत नहीं? समझ नहीं आता कि ये अफसर इंसान हैं या सड़क की दलाली करने वाले कसाई?
सूत्र बताते है कि विभागीय मंत्री ने काम की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करने और बेहतर क्वालिटी की सड़क बनाए जाने की बात अफसरों से कही थी। जिन अफसरों के खिलाफ शिकायत मिली उन्हें भी उन्होंने सख्त लहजे में समझाया था कि बेईमानी बर्दाश्त नहीं होगी, सुधर जाओ नहीं तो सुधार दिए जाओगे। कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहे।
वैसे अब समय आ गया है कि इन भ्रष्ट अधिकारियों की ‘रगड़ाई’ हो। छत्तीसगढ़ की सड़कें, जो जनता के टैक्स से बनती हैं, उन पर इन दीमकों को और कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। इन भ्रष्ट अफसरों को या तो जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए या फिर उन सड़कों के गड्ढों में, जो इनकी कमीशनखोरी का नतीजा हैं।