Saturday | Jun 20, 2026
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रात की बैठक और दिन के सपने: सत्ता के भीतर कौन बुन रहा है सियासी जाल?

Raw File | 20 Jun 2026 | छत्तीसगढ़, प्रदेश

रायपुर/मुख्यमंत्री निवास में रात 9 बजे अचानक मंत्रियों की। बैठक बुलाए जाने की खबर क्या फैली, सत्ता के गलियारों में कल्पनाओं के घोड़े ऐसी रफ्तार से दौड़े कि कुछ लोगों ने तो सरकार बदलने तक का सपना देख लिया। किसी ने मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा शुरू कर दी, किसी ने गुजरात मॉडल खोज लिया, तो कुछ उत्साही समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अपने एक नेता को मुख्यमंत्री घोषित करने में भी देर नहीं लगाई। ऐसा लग रहा था कि बैठक मुख्यमंत्री निवास में नहीं, राजभवन में चल रही हो।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिन मंत्री जी के विभाग को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठते रहे हैं, जिनके कार्यकाल में विवादों ने सरकार की छवि को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, जिनके विभाग की उपलब्धियों से ज्यादा चर्चाएं आरोपों और सफाइयों की रही हैं, उनके समर्थक सबसे ज्यादा उत्साहित दिखाई दिए। मुख्यमंत्री बनने के लिए उनके क्षेत्र में शुभकामनाओं का दौर शुरू हो गया। कुछ ने तो मंदिरों में जाकर नारियल तक फोड़ डाला, मिठाईयां तक बांट डाली। यकीन नहीं हो रहा हो तो इस पूरी खबर को पढ़ने के बाद कथित नेताजी के विधानसभा क्षेत्र में किसी भी कार्यकर्ता को फोन लगाकर पुष्टि कर लीजिएगा। 
राजनीति में महत्वाकांक्षा बुरी बात नहीं है, लेकिन जब महत्वाकांक्षा प्रदर्शन से बड़ी हो जाए तो वह हास्य पैदा करती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के लिए भी यह एक संकेत होना चाहिए। लोकतंत्र में विपक्ष का हमला दिखाई देता है, उसका जवाब भी दिया जा सकता है। लेकिन सत्ता के भीतर बैठी महत्वाकांक्षाओं का कोई चेहरा नहीं होता। वे सामने खड़े होकर विरोध नहीं करते, बल्कि कंधे पर हाथ रखकर साथ चलते हैं। मंच पर सबसे जोर से जय-जयकार भी वही करते हैं और और पीठ पीछे षड्यंत्र भी वही रचते है।

किसी भी सरकार को विपक्ष उतना नुकसान नहीं पहुंचा पाता जितना कुछ गलत लोग सत्ता के भीतर रहकर पहुंचा देते हैं। विपक्ष बाहर से पत्थर फेंकता है, लेकिन भीतर बैठे कई लोग नींव कमजोर कर देते हैं। यही कारण है कि इतिहास में कई राजा युद्ध के मैदान में नहीं, अपने ही दरबार में हार गए।

छत्तीसगढ़ सरकार की उपलब्धियां कम नहीं हैं। नक्सल मोर्चे पर सफलता मिली है, विकास कार्य आगे बढ़ रहे हैं और मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत छवि भी अपेक्षाकृत साफ-सुथरी बनी हुई है। लेकिन यदि सरकार की बदनामी किसी एक चेहरे की वजह से बार-बार होती रहे और वही चेहरा खुद को राज्य के भविष्य का तारणहार समझने लगें, तो यह राजनीतिक विडंबना ही कही जाएगी।

रात की बैठक खत्म हो गई, सरकार जस की तस रही, मुख्यमंत्री भी वही रहे। लेकिन इस घटना ने एक बात जरूर याद दिला दी कि मुख्यमंत्री को हमेशा सिर्फ विपक्ष से ही सावधान रहने की जरूरत नहीं होती।

मुख्यमंत्री जी, विपक्ष सामने से वार करता है इसलिए दिखाई देता है। असली खतरा उन लोगों से होता है जो हर तस्वीर में आपके बगल में खड़े रहते हैं, हर मंच पर आपकी तारीफ करते हैं और अफवाह उड़ाकर खुद को आपका उत्तराधिकारी बताने लगते हैं। राजनीति में सबसे ज्यादा खतरा आस्तीन में पल रहे सांपों से होता है।

राजनीति में एक पुरानी कहावत है कि कुछ लोग पेड़ की छांव में बैठकर उसी पेड़ की जड़ें काटने का सपना देखते हैं। सत्ता के गलियारों में ऐसे चरित्र हर दौर में मिल जाते हैं। चेहरे पर वफादारी झलकती है, शब्दों में समर्पण दिखता है और मन में कुर्सी से हटाने की चाल चलती रहती है।

(देवेंद्र किशोर गुप्ता)


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