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सुनने की संस्कृति को सुशासन का आधार बनाने वाला नेतृत्व…विष्णुदेव साय

सीएम हेल्पलाइन: जनता और मुख्यमंत्री के बीच भरोसे की सीधी डोर

रायपुर/ लोकतंत्र की असली ताकत चुनाव जीतने में नहीं, बल्कि चुनाव के बाद जनता की बात सुनने में होती है। सत्ता का सबसे कठिन क्षण वह नहीं होता जब विपक्ष सवाल पूछता है, बल्कि वह होता है जब आम आदमी सीधे सवाल पूछता है। छत्तीसगढ़ में शुरू हुई सीएम हेल्पलाइन 1076 इसी साहस, पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रतीक बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का व्यक्तित्व समझे बिना इस पहल को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। वे उन नेताओं में से नहीं हैं जो हर दिन सुर्खियों में बने रहने के लिए बयान देते हों। उनका स्वभाव छत्तीसगढ़ के गांवों और आदिवासी अंचलों की मिट्टी की तरह सहज और सरल है। राजनीति में अक्सर तेज-तर्रार छवि को नेतृत्व का पैमाना मान लिया जाता है, लेकिन विष्णु देव साय ने यह साबित किया है कि शांत स्वभाव और संवेदनशील दृष्टिकोण भी प्रभावी शासन का आधार बन सकते हैं।

ढाई वर्षों के कार्यकाल में उनकी कार्यशैली का एक बड़ा पक्ष यह रहा है कि उन्होंने योजनाओं के प्रचार से अधिक उनके क्रियान्वयन पर जोर दिया। शायद यही कारण है कि जब जनता से सीधे संवाद करने और शिकायतें सुनने का अवसर आया, तो उन्होंने उससे दूरी बनाने के बजाय उसे और मजबूत करने का निर्णय लिया। सीएम हेल्पलाइन उसी सोच का विस्तार है।

इस हेल्पलाइन की सबसे बड़ी विशेषता केवल यह नहीं है कि शिकायत दर्ज होगी, बल्कि यह है कि हर शिकायत को एक यूनिक आईडी मिलेगी, उसकी निगरानी होगी, समयबद्ध निराकरण होगा और यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं है तो पुनः समीक्षा का अवसर भी मिलेगा। यह व्यवस्था सरकार को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाती है।

हाल ही में जब मुख्यमंत्री ने स्वयं हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल रिसीव की और शिकायतकर्ता से सीधे बात की, तो यह केवल एक प्रतीकात्मक घटना नहीं थी। यह संदेश था कि सरकार फाइलों के पीछे नहीं छिपना चाहती, बल्कि नागरिक की आवाज सीधे सुनना चाहती है। एक मुख्यमंत्री का स्वयं फोन उठाना बताता है कि यह पहल केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि संवेदनशील शासन का प्रयास है।

दरअसल, सीएम हेल्पलाइन सरकार के लिए भी एक आईना है। यह वह मंच है जहां जनता सरकार को बताती है कि व्यवस्था कहां सफल है और कहां सुधार की जरूरत है। जो सरकार जनता की शिकायतों से डरती है, वह ऐसे मंच बनाने से बचती है। लेकिन जो सरकार अपने काम पर भरोसा रखती है, वह जनता के सामने सीधे खड़ी होती है। छत्तीसगढ़ सरकार ने यही रास्ता चुना है।

आज जब शासन-प्रशासन में तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है, तब उसका उद्देश्य केवल डिजिटलीकरण नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिक को सम्मान और सुविधा देना होना चाहिए। 24 घंटे सक्रिय सीएम हेल्पलाइन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां गांव का किसान, शहर का मजदूर, छात्र, महिला या बुजुर्ग बिना किसी बिचौलिए के अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकता है।

अंततः, सीएम हेल्पलाइन सिर्फ एक फोन नंबर नहीं है। यह उस विश्वास का नाम है जिसमें सरकार जनता से कह रही है “आप अपनी बात कहिए, हम सुनने के लिए तैयार हैं।” और शायद लोकतंत्र की सबसे सुंदर तस्वीर भी यही है कि सत्ता और जनता के बीच की दूरी कम हो, संवाद बढ़े और समस्याओं का समाधान केवल कागजों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई दे।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि सरलता कमजोरी नहीं होती। कभी-कभी सबसे शांत दिखने वाला नेतृत्व ही सबसे गहराई से जनता की आवाज सुन रहा होता है। और जब शासन सुनने लगता है, तभी सुशासन की शुरुआत होती है।

(देवेंद्र किशोर गुप्ता)


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