स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में संवेदनहीनों का आतंक
चिरमिरी/ एमसीबी जिले से सामने आई यह घटना सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं है बल्कि हमारे राज्य छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता का जीवंत प्रमाण है।
ग्राम चिडोला की रहने वाली प्रेमबाई गोंड पर 20 जून 2025 को भालू ने हमला किया। सिर पर गंभीर चोट आई, एक आंख हमेशा के लिए चली गई। जिंदगी पहले ही अंधेरे में डूब चुकी थी, लेकिन असली दर्द उसके बाद शुरू हुआ सरकारी दफ्तरों के चक्कर।
वन विभाग से सहायता राशि पाने के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र जरूरी था। एक घायल आदिवासी महिला, जो ठीक से चल भी नहीं पा रही, उसे छह-छह बार मनेंद्रगढ़ मेडिकल बोर्ड के सामने जाना पड़ा।
लेकिन वहां बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों का दिल नहीं पसीजा। हर बार कोई नया बहाना, नई तारीख, नई फाइल…मगर प्रमाण पत्र नहीं दिया।
यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मेडिकल बोर्ड को और क्या चाहिए? एक आंख खो चुकी महिला क्या अपनी पीड़ा साबित करने के लिए रोज-रोज जख्म दिखाए? क्या सिस्टम अब इंसान की तकलीफ नहीं, सिर्फ कागज पहचानता है?
घटना को लगभग एक साल होने जा रहा है।घाव आज भी पूरी तरह नहीं भरे हैं। लेकिन सरकारी संवेदनाएं तो शायद जन्म से ही मृत हैं।और विडंबना देखिए यह वही एमसीबी जिला है, जो स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का गृह जिला है। अगर मंत्री अपने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था तक को मानवीय नहीं बना पाए, तो पूरे प्रदेश की चिंता कैसे करेंगे?
समझने वाली बात है कि यह मामला सिर्फ एक प्रमाण पत्र का नहीं है। यह उस व्यवस्था का चेहरा है जहां गरीब, आदिवासी और असहाय इंसान को इंसान नहीं, निर्जीव समझा जाता है।
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह भी है कि वर्ष 2019 में बिलासपुर में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार होने वाले डॉ. अवनीश खरे आज यहां सीएमएचओ बनकर बैठे है। आज फर्क बस इतना है कि तब रिश्वत पकड़ी गई थी, आज संवेदनहीनता पकड़ी गई है।
मेरा मानना है कि चिरमिरी जिला अस्पताल, मेडिकल बोर्ड और सीएमएचओ के कार्यप्रणाली की गंभीरता के साथ जांच होनी चाहिए।
क्योंकि जब एक आंख गंवा चुकी आदिवासी महिला को भी न्याय पाने के लिए सालभर भटकना पड़े, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं व्यवस्था का अमानवीय पतन है।
एक आदिवासी मुख्यमंत्री के शासन में एक आदिवासी महिला इस तरह अपमानित और प्रताड़ित हो रही है, यह पूरे सिस्टम के माथे पर कलंक है।
वीडियो साभार – वरिष्ठ पत्रकार अविनाश विश्वकर्मा के वॉल से…