मारुति लाइफस्टाइल के रहवासियों ने उठाए सवाल “जब रेरा ने लिख दिया, तो अब तक बार बंद क्यों नहीं हुआ?
रायपुर। राजधानी रायपुर के महोबा बाजार स्थित मारुति लाइफस्टाइल रेसिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी में संचालित व्यावसायिक बार को लेकर अब सीधे कलेक्टर रायपुर गौरव सिंह की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। रहवासियों का आरोप है कि रिहायशी इलाके में बार संचालन को लेकर लगातार शिकायतें की गईं, यहां तक कि छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने भी कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रायपुर को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की बात कही इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 
यही वजह है कि पूरे मामले में अब सबसे बड़ा प्रश्न कलेक्टर रायपुर की भूमिका को लेकर उठ रहा है। क्योंकि जब एक वैधानिक संस्था ने स्वयं मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन को कार्रवाई हेतु पत्र भेजा, तब भी प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी आखिर क्यों बनी हुई है?
मारुति लाइफस्टाइल सोसायटी के रहवासियों ने अपने शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि कॉलोनी पूरी तरह आवासीय क्षेत्र है। जहां लगभग 350 परिवार यानी लगभग 2 हजार लोग रहते हैं। इसके बावजूद परिसर के भीतर बिल्डर अविनाश डेवलपर द्वारा व्यावसायिक बार का संचालन किया जा रहा है। जिससे आए दिन असुरक्षा और अव्यवस्था की स्थिति निर्मित हो रही है।
रहवासियों के अनुसार रात देर तक बार खुला रहता है।बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ती है और शराबियों के कारण परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई बार विवाद और अशांति की स्थिति बन चुकी है। इसके बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव सीधे-सीधे जिला प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करता है। 
रेरा ने कलेक्टर रायपुर को भेजे अपने पत्र में साफ तौर लिखा है कि बार संचालन संबंधी शिकायत उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए अग्रिम कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा की जानी चाहिए। इसके बावजूद कलेक्टर कार्यालय की ओर से अब तक किसी कार्रवाई नहीं की गई है।
यहीं से संदेह और गहराता है। आखिर ऐसा क्या कारण है कि इतने संवेदनशील मामले में कलेक्टर स्तर पर चुप्पी बनी हुई है? क्या किसी प्रभावशाली दबाव के चलते कार्रवाई रोकी जा रही है, या फिर रहवासियों की सुरक्षा जिला प्रशासन की प्राथमिकता में ही नहीं है? या फिर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता बिल्डर अरुण सिंघानिया से यह मामला जुड़ा हुआ है इसलिए कलेक्टर के हाथ-पांव फूल रहे हैं?
रहवासियों का कहना है कि यदि रेरा के पत्र के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो इसका सीधा संदेश यही जाता है कि आम नागरिकों की शिकायतें प्रशासनिक फाइलों में दबकर रह जाती हैं। लोगों का यह भी कहना है कि यदि यही स्थिति किसी अन्य वीआईपी इलाके में होती, तो शायद प्रशासन अब तक कई कदम उठा चुका होता।
अब पूरा मामला कलेक्टर रायपुर की जवाबदेही पर आकर टिक गया है। क्योंकि रेरा द्वारा संज्ञान लेने और पत्र भेजने के बाद कार्रवाई सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी थी। ऐसे में सवाल केवल बार संचालन का नहीं, बल्कि कलेक्टर गौरव सिंह की जवाबदेही और आम नागरिकों के भरोसे का भी है।