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अगर हिड़मा ही रोल मॉडल है, तो कांग्रेस अपने दफ्तर से महात्मा गांधी की तस्वीर उतार दे!

Raw File | 13 Jul 2026 | चाबुक, छत्तीसगढ़

रायपुर/ भारत में विचारों की लड़ाई संवैधानिक मर्यादाओं में लड़ी जाती है, गोलियों से नहीं। हम सभी को असहमति का अधिकार, आंदोलन का अधिकार, अदालत जाने का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार है। लेकिन अगर सैकड़ों निर्दोष लोगों और सुरक्षाकर्मियों की हत्या के आरोपों से जुड़े एक नक्सली को कोई जनप्रतिनिधि “युवाओं का रोल मॉडल” बताने लगे, तो सवाल केवल उस नेता पर नहीं, बल्कि उसकी विचारधारा पर भी खड़ा होता है।

हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ बातचीत में कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लड़ने वाला हिड़मा युवाओं का रोल मॉडल है तो हमारा भी रोल मॉडल है। अपने विधायक के ऐसे बयान के बाद कांग्रेस को देश के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसका आदर्श आखिर कौन है महात्मा गांधी या हिड़मा?

माड़वी हिड़मा का नाम देश के सबसे खूनी नक्सली हमलों से जोड़ा जाता रहा है। 6 अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा के ताड़मेटला हमले में 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए। 25 मई 2013 के झीरम घाटी नरसंहार में 32 लोगों की हत्या हुई, जिनमें कांग्रेस के दिग्गज नेता महेंद्र कर्मा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल और बाद में निधन को प्राप्त हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल भी शामिल थे। 24 अप्रैल 2017 को बुरकापाल में 25 जवान, 11 मार्च 2020 को मिनपा में 17 सुरक्षाकर्मी और 3 अप्रैल 2021 को तर्रेम-जोन्नागुड़ा में 22 जवान शहीद हुए। इन घटनाओं में सुरक्षा एजेंसियां हिड़मा की महत्वपूर्ण भूमिका बताती रही हैं।

यानी जिस व्यक्ति का नाम 170 से अधिक लोगों की मौत से जुड़े बड़े नक्सली हमलों में बार-बार सामने आता रहा हो, उसे यदि कोई विधायक युवाओं का रोल मॉडल बताए, तो यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि उन शहीद परिवारों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।

सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि अटल श्रीवास्तव उसी कांग्रेस पार्टी के नेता विधायक हैं, जो महात्मा गांधी की अहिंसा को अपनी सबसे बड़ी वैचारिक विरासत बताती है। कांग्रेस आज भी कहती है कि देश को आज़ादी सत्य और अहिंसा के बल पर मिली। फिर वही कांग्रेस यदि बंदूक के रास्ते पर चलने वाले व्यक्ति को आदर्श बताए, तो यह गांधी के विचारों का अपमान नहीं तो और क्या है?

क्या अटल श्रीवास्तव जी भूल गए कि जीरम घाटी हत्याकांड में सबसे बड़ा राजनीतिक नुकसान छत्तीसगढ़ कांग्रेस को ही हुआ था? कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की पूरी पीढ़ी उस हमले में खत्म हो गई। जिस हिड़मा का नाम उस हमले के कथित मास्टरमाइंड के रूप में लिया जाता रहा, उसी को रोल मॉडल बताना कांग्रेस के अपने शहीद नेताओं की स्मृति का भी अपमान है।

व्यक्तिगत तौर पर मैं हिड़मा से नफरत नहीं करता। मुझे लगता है कि वह बस्तर का एक भटका हुआ नौजवान था। लेकिन भटकाव और बर्बरता में फर्क होता है। जो रास्ता सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दे, दर्जनों बच्चों से उनके पिता छीन ले, माताओं की गोद सूनी कर दे और जवानों के ताबूत घर भेजे, वह रास्ता कभी आदर्श नहीं हो सकता।

हिड़मा से सहानुभूति हो सकती है कि वह गलत रास्ते पर चला गया, लेकिन उसके अपराधों का महिमामंडन नहीं किया जा सकता। वह युवाओं के लिए रोल मॉडल नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि हिंसा का रास्ता अंततः विनाश की ओर ले जाता है।

और यदि कांग्रेस वास्तव में अटल श्रीवास्तव के बयान से सहमत है, तो उसे नैतिक साहस दिखाना चाहिए। राजीव भवन में महात्मा गांधी की तस्वीर उतार दीजिए और उसकी जगह हिड़मा की तस्वीर लगा दीजिए। क्योंकि महात्मा गांधी की अहिंसा और हिड़मा की हिंसा दोनों एक साथ किसी भी विचारधारा के आदर्श नहीं हो सकते।

(देवेंद्र किशोर गुप्ता)


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