रायपुर/ सरकार की असली पहचान घोषणाओं से नहीं, कार्रवाई से होती है। जब शिकायत दर्ज हो और उसके बाद दोषियों पर कार्रवाई भी दिखाई दे, तभी जनता का भरोसा मजबूत होता है।
सरगुजा में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर किसानों की शिकायत के बाद कृषि विभाग द्वारा अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले अंबिकापुर के मैसर्स सरगुजा कृषि राय केंद्र पर छापा मारकर 3219 बोरी उर्वरक जब्त करना और केंद्र को सील करना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि अब किसानों के साथ धोखाधड़ी आसान नहीं होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जब 1076 हेल्पलाइन शुरू की थी, तब कई लोगों को संदेह था कि यह भी सिर्फ एक औपचारिक व्यवस्था बनकर रह जाएगी। लेकिन अब लगातार सामने आ रही कार्रवाइयाँ बता रही हैं कि शिकायतों को केवल दर्ज नहीं किया जा रहा, उन पर निर्णय भी हो रहा है।
विष्णुदेव साय की सबसे बड़ी ताकत उनका व्यक्तित्व है। लगभग साढ़े तीन दशक के सार्वजनिक जीवन, सांसद और केंद्रीय मंत्री जैसे बड़े पदों पर रहने के बावजूद उनके व्यवहार में सहजता और सादगी दिखाई देती है। वे प्रचार से अधिक परिणामों पर विश्वास करते हैं। शायद यही कारण है कि वे स्वयं कम बोलते हैं, लेकिन प्रशासन को बोलने का अवसर देते हैं।
यह भी सच है कि वर्षों से व्यवस्था में जमी अनियमितताएँ कुछ महीनों या कुछ वर्षों में पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकतीं। भ्रष्टाचार और बेईमानी ने कई जगह गहरी जड़ें जमा रखी हैं। फिर भी यदि ईमानदार प्रयास लगातार हों, शिकायतों पर कार्रवाई हो और दोषियों में कानून का भय पैदा हो, तो बदलाव की शुरुआत वहीं से होती है।
किसानों के हितों की रक्षा केवल समर्थन मूल्य बढ़ाने से नहीं होती, बल्कि यह सुनिश्चित करने से भी होती है कि उन्हें खाद, बीज और अन्य आवश्यक सामग्री सही कीमत पर मिले। सरगुजा की यह कार्रवाई उसी सोच का प्रमाण है।
जनता की आवाज़ यदि सीधे सरकार तक पहुँचे और सरकार उस आवाज़ को सुनकर कार्रवाई करे, तो लोकतंत्र मजबूत होता है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 इसी विश्वास का माध्यम बनती दिखाई दे रही है।
उम्मीद है कि ऐसी निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। जब गलत करने वालों पर कानून का सुदर्शन चक्र चलता है, तब ईमानदार लोगों का विश्वास और मजबूत होता है।
@ देवेंद्र किशोर गुप्ता