मेडिकल छत्रों से एक महीने का वादा…एक साल बाद भी उनका हॉस्टल अधूरा!
रायपुर/ पूरे एक साल बाद भी तस्वीर लगभग वहीं की वहीं है। पिछले साल रायपुर मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में चिकित्सक दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की मौजूदगी में मेडिकल छात्रों ने “हमें हॉस्टल चाहिए” के नारे लगाए थे। मुख्यमंत्री के सामने स्वास्थ्य मंत्री ने एक महीने में काम शुरू कराने का भरोसा दिया था, लेकिन आज एक साल बाद भी मेडिकल कॉलेज के छात्रों, डॉक्टरों और कर्मचारियों से जुड़ा यह आवासीय परिसर अधूरा पड़ा है।
(पुरानी वीडियो)
यह कोई खंडहर नहीं है। रायपुर के गंज थाना पुलिस आवासीय परिसर के पास वन विभाग के परिसर में मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए हॉस्टल और डॉक्टरों व कर्मचारियों के लिए 2-BHK और 3-BHK आवास बनाए जा रहे हैं। कोविड काल में भवन की संरचना में बदलाव के बाद काम बंद हुआ तो फिर ठीक से शुरू ही नहीं हो सका। हमारा सवाल यह है कि तीन साल में भी स्वास्थ्य विभाग इस अधूरे काम को पूरा क्यों नहीं करा पाया? सबसे आश्चर्य की बात यह है कि जब स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एक महीने में काम शुरू होने की बात कही थी बावजूद उस वादे की लाज वो नहीं रख सके। 
मंत्री जी को समझना चाहिए कि हर समस्या का समाधान केवल एक नई तारीख देना नहीं होता। जो उनके आदत में सुमार है। कभी एक महीने का आश्वासन, कभी जल्द काम पूरा होने की बात और अब जुलाई में काम शुरू होने की उम्मीद। आखिर मेडिकल छात्र किस बात पर भरोसा करें? दिसंबर 2025 में रायपुर मेडिकल कॉलेज के लिए 120 सीटों वाला अनुबंधित छात्रावास शुरू किया गया था और तब भी स्थायी छात्रावास का निर्माण जल्द पूरा करने की बात कही गई थी।

स्वास्थ्य विभाग में समस्या केवल इस एक अधूरे हॉस्टल की नहीं है। बार-बार ऐसा लगता है कि पहले तैयारी अधूरी रहती है, फिर मामला बिगड़ता है और उसके बाद आश्वासन दिया जाता है। मंत्री जी खुद तो सवालों में घिरते ही हैं, लेकिन अपनी कार्यशैली से पूरी सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर देते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार सुशासन और तेज कामकाज की बात करती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ऐसी तस्वीरें सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।

मेडिकल छात्र कोई एहसान नहीं मांग रहे हैं। हॉस्टल उनकी बुनियादी जरूरत है। डॉक्टर और कर्मचारी भी वर्षों से अधूरे पड़े आवासीय परिसर के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। यदि कोई तकनीकी समस्या है तो सरकार साफ बताए, यदि ठेकेदार की गलती है तो कार्रवाई करे, यदि बजट की कमी है तो उसका समाधान निकाले। लेकिन हर कुछ महीने बाद एक नई तारीख देकर पुराने वादे को भुला देना ठीक नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री जी, अब नई तारीख देने से पहले पुराने वादे का हिसाब दीजिए। एक महीने में काम शुरू कराने का भरोसा दिया था, पूरा एक साल गुजर गया। आखिर काम क्यों नहीं हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्योंकि आश्वासन से भाषण तो पूरे हो सकते हैं, हॉस्टल नहीं।