खनिज माफियाओं पर चला सुशासन का बुलडोजर, दो माह में 1,747 कार्रवाई, 6.49 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना
रायपुर, 25 जून 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक तेवरों ने छत्तीसगढ़ में खनिज माफियाओं की कमर तोड़ने का काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश पर अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे विशेष अभियान ने महज अप्रैल और मई 2026 के दौरान ही 1,747 प्रकरण दर्ज कर एक बड़ा संदेश दिया है कि अब राज्य के खनिज संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये की दाण्डिक राशि भी वसूली गई।
अभियान के तहत 1,487 मामले अवैध परिवहन, 231 मामले अवैध उत्खनन तथा 29 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए। यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार केवल अवैध खनन ही नहीं, बल्कि खनिजों की पूरी सप्लाई चेन पर सख्त निगरानी रखते हुए कार्रवाई कर रही है।
अवैध उत्खनन के मामलों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला 44 प्रकरणों के साथ सबसे ऊपर रहा। इसके बाद रायपुर (15), कबीरधाम (14) और बालोद (14) का स्थान रहा। वहीं अवैध परिवहन में रायपुर में 173, जांजगीर-चांपा में 162, बिलासपुर में 101 और धमतरी में 101 मामले दर्ज किए गए। अवैध भंडारण के सर्वाधिक 8 मामले रायपुर में पकड़े गए, जबकि दंतेवाड़ा में 4, तथा कांकेर और बिलासपुर में 3-3 मामले सामने आए।
दाण्डिक राशि की वसूली में भी सरकार की सख्ती स्पष्ट दिखाई दी। अवैध उत्खनन के मामलों में दंतेवाड़ा से सर्वाधिक 55.32 लाख रुपये, अवैध परिवहन में रायपुर से 54.69 लाख रुपये तथा अवैध भंडारण में भी रायपुर से 12.58 लाख रुपये की वसूली की गई। कुल दण्ड वसूली में रायपुर जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केवल कार्रवाई के निर्देश ही नहीं दिए, बल्कि कानून को भी पहले से कहीं अधिक कठोर बनाया है। गौण खनिज नियमों में संशोधन के बाद अब किसी भी मामले में प्रशमन राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये प्रशमन शुल्क के साथ खनिज का पूरा मूल्य अलग से वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत का मूल्य देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा जब्त वाहन, मशीन या उपकरण की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार रुपये से 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को खनिज विभाग के सचिव पी.दयानंद ने प्रशासनिक सख्ती के साथ लागू किया। उनकी सतत मॉनिटरिंग और कड़ी प्रशासनिक निगरानी के चलते अवैध खनन के विरुद्ध अभियान लगातार तेज़ हुआ है। परिणामस्वरूप खनिज माफियाओं के खिलाफ रिकॉर्ड कार्रवाई और कड़े दंड की व्यवस्था ने कानून का भय स्थापित किया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का स्पष्ट संदेश है कि छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार जनता का है, माफियाओं का नहीं। यही कारण है कि उनकी सरकार अवैध खनन के खिलाफ केवल अभियान नहीं चला रही, बल्कि ऐसा कठोर तंत्र विकसित कर रही है, जिससे भविष्य में भी खनिज माफियाओं के लिए कानून से बच निकलना आसान न रहे।
(रॉ फाइल ब्यूरो)