भाजपा कार्यालय में सोशल मीडिया का काम करने वाले करीब 20 स्किल्ड युवाओं का वेतन रोक दिया गया है। ऐसा किया जाना केवल एक भुगतान का मामला नहीं है, यह इंसानियत, जिम्मेदारी और न्याय का भी सवाल है। इन युवाओं ने कोई बाहर बैठकर दूर से काम नहीं किया, बल्कि भाजपा कार्यालय में रहकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और जिम्मेदार पदाधिकारियों के निर्देशानुसार लगातार सोशल मीडिया का कार्य किया है।
कंटेंट तैयार करना, पोस्ट बनाना, रणनीति के अनुसार मैसेजिंग चलाना, जवाबी नैरेटिव तैयार करना और दिन-रात संगठन के लिए डिजिटल मोर्चे पर सक्रिय रहना कोई सामान्य काम नहीं होता। यह मेहनत भी है और कौशल भी। जिसकी कीमत तय होती है और जिसका भुगतान समय पर होना चाहिए। अब बताया जा रहा है कि इस काम का ठेका लेने वाला व्यक्ति किसी मामले में जेल चला गया है, इसलिए युवाओं की सैलरी रोक दी गई है। लेकिन सवाल यह है कि ठेकेदार के जेल जाने से क्या इन युवाओं की मेहनत खत्म हो जाती है? क्या उनके घर की जिम्मेदारियाँ, किराया, रोजमर्रा का खर्च और परिवार की जरूरतें भी जेल में बंद हो जाती हैं?
जिस कार्यालय में बैठकर काम हुआ, जिस संगठन के लिए मेहनत लगी और जिनके निर्देशानुसार कार्य हुआ, उनकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि इन युवाओं का मेहनताना रोका न जाए। कानून अपना काम करेगा, ठेकेदार के साथ जो भी प्रक्रिया है वह अलग विषय है, लेकिन जिन युवाओं ने पूरा समय और ऊर्जा लगाकर संगठन का कार्य किया, उनकी कमाई को किसी तीसरे व्यक्ति की स्थिति के कारण रोकना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
यह वही युवा हैं जो आज के दौर में पार्टी की आवाज़ को डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जिन पर भरोसा करके जिम्मेदार लोग उन्हें काम सौंपते हैं। ऐसे में यदि मेहनत करने वाले युवाओं को समय पर वेतन न मिले तो यह संदेश जाता है कि मेहनत का सम्मान नहीं है, जबकि किसी भी संगठन की असली ताकत वही लोग होते हैं जो पर्दे के पीछे रहकर लगातार काम करते हैं।
इसलिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इन युवाओं को उनके किए गए काम का पूरा भुगतान तत्काल किया जाना उचित होगा। क्योंकि ठेकेदार जेल में हो सकता है, लेकिन मेहनत करने वाले युवाओं का हक जेल में नहीं होना चाहिए। राज्य भाजपा के भाई साहब जो आजकल बंगाल प्रवास पर ज्यादा रहते है उनके हस्ताक्षर से ही सोशल मीडिया के उन युवाओं का भुगतान होता है। इसलिए जरूरी है कि यह संदेश उन तक पहुंचे।