गरियाबंद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गरियाबंद जिला में चल रही संविदा भर्ती प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ियां सामने आई है। भर्ती विज्ञापन में तय शर्तों को जानबूझकर दरकिनार कर अपात्र अभ्यर्थियों को पात्र बनाया गया, जबकि योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। यह आरोप रायपुर निवासी राहुल साहू ने लगाया है और मय दस्तावेज कलेक्टर गरियाबंद को शिकायत की है। 
राहुल ने शिकायत में बताया की भर्ती विज्ञापन की कंडिका क्रमांक 7 में स्पष्ट लिखा था कि आवेदन पत्र में फोटो और प्रमाणपत्र स्व–प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में आवेदन स्वतः निरस्त माना जाएगा, लेकिन आरोप है कि इसी नियम को तोड़ते हुए बहुत से ऐसे आवेदकों को पात्र घोषित किया गया जिनके फोटो और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर तक नहीं थे। जब प्रारंभिक पात्र–अपात्र सूची जारी की गई, तब भी बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए जो नियमों के अनुसार अपात्र थे, इसके बावजूद दावा–आपत्ति के नाम पर उन्हें पात्र कर दिया गया। 
आरोप है कि लगभग 40 से 50 ऐसे अभ्यर्थी हैं, जो नियमों के अनुसार अपात्र थे, लेकिन अब मेरिट सूची में जगह बना चुके हैं।
मेरिट सूची को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। फार्मासिस्ट पद पर मात्र 36 प्रतिशत अंक वाले अभ्यर्थी को मेरिट सूची में दूसरा स्थान दे दिया गया, जबकि उससे अधिक अंक प्राप्त करने वालों को सूची से बाहर कर दिया गया। इसी तरह सीएचओ पद पर अनुसूचित जनजाति वर्ग में 52 अंक पाने वाले अभ्यर्थी को बाहर कर दिया गया और 49 प्रतिशत अंक वाले को मेरिट में रखा गया। एमपीडब्ल्यू और स्टाफ नर्स जैसे पदों पर भी कम अंक वालों को आगे और अधिक अंक वालों को पीछे कर देने के कई उदाहरण सामने आए हैं। 
शिकायत में इसे भी बेहद चौंकाने वाला बताया गया है कि अनारक्षित श्रेणी के पदों पर जाति प्रमाणपत्र संलग्न नहीं करने के आधार पर अभ्यर्थियों को अपात्र घोषित कर दिया गया, जबकि सामान्य श्रेणी में जाति प्रमाणपत्र की कोई अनिवार्यता ही नहीं होती। आरोप है कि यह सब पहले से तय ‘सेटिंग’ के तहत किया गया और चयन समिति ने बुनियादी नियमों तक को नजरअंदाज कर दिया।
इसके अलावा कई अभ्यर्थियों को कोविड-19 अनुभव के 10 अतिरिक्त अंक दिए जाने का भी आरोप है, जबकि उनके पास कोविड से जुड़ा कोई वैध अनुभव प्रमाणपत्र नहीं है। दावा–आपत्ति के दौरान भी कई ऐसे योग्य अभ्यर्थियों को पात्र नहीं किया गया, जिनके दस्तावेज पूरे थे, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर रिश्वत देने से इनकार कर दिया।
मामले को दबाने और जल्दबाजी में प्रक्रिया पूरी करने के इरादे से 27 तारीख को नोटिस जारी कर 2 फरवरी से परीक्षा आयोजित करने का आरोप भी लगाया गया है, ताकि किसी को जांच या हस्तक्षेप का मौका न मिल सके। शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि इतनी सारी गलतियां महज इत्तेफाक नहीं हो सकतीं, बल्कि यह सुनियोजित तरीके से नियम तोड़कर अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने का मामला है।
पूरे प्रकरण में जिला स्तर पर पदस्थ जिला प्रबंधक और एनएचएम के स्थापना सहायक पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि सब कुछ जानकारी में होने के बावजूद सीएचएमओ की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर कार्यालय गरियाबंद से मांग की है कि इस भर्ती प्रक्रिया को तत्काल निरस्त या स्थगित किया जाए, भर्ती समिति को भंग कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो, मेरिट के आधार पर सूची का पुनर्गठन किया जाए और नियम तोड़कर पात्र बनाए गए अभ्यर्थियों को फिर से अपात्र घोषित किया जाए।
अब सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बाद जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, क्योंकि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो यह मामला केवल एक जिला नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।