रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन) मेडिकल घोटाले में एक बार फिर बड़ा अपडेट सामने आया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्रालय, ने CGMSC के प्रबंध संचालक को पत्र जारी कर शिकायत के संबंध में तत्काल तथ्यात्मक प्रतिवेदन/स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यह पत्र दिनांक 19-01-2026 को जारी हुआ है।
पत्र में उल्लेख है कि तत्कालीन एमडी CGMSC चंद्रकांत वर्मा, तत्कालीन जीएम (फाइनेंस)मीनाक्षी गौतम एवं जीएम (टेक्निकल) हिरन मनुभाई पटेल के विरुद्ध Ms ANG Life Science India Ltd, को नियम विरुद्ध तरीके से शासकीय करोड़ों रुपये का भुगतान किए जाने संबंध में शिकायत की गई थी। इस शिकायत पर विभाग द्वारा तथ्यात्मक प्रतिवेदन चाहा गया था, जो आज दिनांक तक अपेक्षित है।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रकरण के संबंध में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) से प्राप्त स्मरण पत्र दिनांक 12-01-2026 की प्रति संलग्न है। निर्देशानुसार, शिकायत के आरोपों के संबंध में तथ्यात्मक प्रतिवेदन विभाग को तत्काल उपलब्ध कराने कहा गया है।
CGMSC घोटाले को लेकर पहले से ही राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल रही है। इस मामले में सामने आया नया पत्र इस बात का संकेत है कि फाइलें जिंदा हैं और जांच के घेरे में आए लोगों से जवाब तलब किया जा रहा है। 
मामले में यह भी चर्चा है कि आगे चलकर EOW/ACB के साथ केंद्रीय एजेंसियां भी जांच की दिशा में सक्रियता बढ़ा सकती हैं। कुछ आईएएस और राजनेता दायरे में आ सकते है। बताया जा रहा है कि CGMSC में खरीदी और भुगतान प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर करोड़ों रुपये के भुगतान किए गए। इस घोटाले को लेकर पहले से ही कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, वहीं अब नए सिरे से नामों पर कार्रवाई की संभावनाएं मजबूत होती दिख रही हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल की भूमिका भी इस प्रकरण में काफी संदिग्ध है क्योंकि सरकार आने के बाद घोटालेबाजों को भुगतान किए जाने के निर्देश इनके द्वारा ही दिया जाना सामने आया है। मुख्य घोटालेबाज मोक्षित कॉरपोरेशन व संबंधित फर्म को भुगतान CGMSC की एचडी रही पद्मिनी भोई ने किया था।
छत्तीसगढ़ की जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्था में हुई कथित लूट और अनियमितताओं पर अब तक की कार्रवाई के बाद यह नया अपडेट एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि “देर-सवेर सबका हिसाब होगा।”
फिलहाल इस पत्र के बाद CGMSC प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं और अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभाग को रिपोर्ट कब तक सौंपी जाती है और जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं।