रामविचार नेताम छत्तीसगढ़ भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं। संगठन से लेकर सत्ता तक उन्होंने लंबे समय तक अपनी भूमिका निभाई है। विष्णुदेव साय भी भाजपा संगठन और सरकार में लंबे राजनीतिक सफर के बाद आज मुख्यमंत्री हैं। दोनों ही आदिवासी नेतृत्व के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।
राजनीति में स्वप्न कौन नहीं देखता? लेकिन हर स्वप्न पूरा हो, यह जरूरी नहीं। आज विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री हैं और रामविचार नेताम सरकार में मंत्री हैं।
इन दोनों के बीच रिश्तों को लेकर राजनीतिक गलियारों में समय-समय पर चर्चाएं और कयास लगते रहे हैं। लेकिन राजनीति की चर्चाओं और व्यक्तिगत रिश्तों में फर्क होता है।
कुछ दिन पहले मुलाकात हुई तो मैंने भी रामविचार भैया से सीधे पूछ लिया…
क्या वाकई मुख्यमंत्री जी और आपके बीच विरोध की कोई खाई है?
रामविचार जी ने जोरदार ठहाका लगाया और कहा…
“मोर छोटे भाई हे वो ह…”
बस, इतना कहते ही बहुत कुछ समझ में आ गया।
राजनीति में पद अलग हो सकते हैं, जिम्मेदारियां अलग हो सकती हैं, विचारों में मतभेद भी हो सकते हैं… लेकिन रिश्ते अगर दिल से हों तो पद और परिस्थितियां उन्हें छोटा नहीं कर सकतीं।
शायद यही राजनीति का सबसे खूबसूरत पक्ष है!
प्रतिस्पर्धा अपनी जगह, अपनापन अपनी जगह।
कयास अपनी जगह, रिश्ते अपनी जगह।😊
(देवेंद्र किशोर गुप्ता)