रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा मुद्दा गरमा गया। वरिष्ठ विधायक सुश्री लता उसेंडी ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को सदन में दिए गए जवाबों को लेकर घेरते हुए आरोप लगाया कि विभाग की ओर से गलत और अधूरी जानकारी दी जा रही है।
प्रश्नकाल के दौरान उसेंडी ने कोंडागांव जिले में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उपस्वास्थ्य केंद्रों के संचालन, उनके सेटअप, कार्यरत कर्मचारियों, रिक्त पदों और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी मांगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि पिछले दो वर्षों में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कितने शासकीय कार्यक्रम आयोजित किए गए और क्या उनमें से किसी का भुगतान लंबित है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने लिखित जवाब में बताया कि कोंडागांव जिले में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत पिछले दो वर्षों (वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26) में कुल 1157 शासकीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं और इनमें किसी भी प्रकार का देयक लंबित नहीं है।
मंत्री के इस जवाब पर विधायक लता उसेंडी ने सवाल उठाते हुए कहा कि कई कार्यक्रम ऐसे हैं जो मौखिक आदेश के आधार पर आयोजित हुए, लेकिन उनका भुगतान अब तक नहीं किया गया है। उन्होंने सदन में पूछा कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यक्रमों का निर्धारण कौन करता है और इसके लिए सक्षम अधिकारी कौन होते हैं।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब दिया कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यक्रमों का आयोजन एनएचएम और राज्य सरकार के स्तर पर तय होता है और प्रमुख कार्यक्रमों के लिए पत्र जारी किए जाते हैं।
उसेंडी ने इसके बाद फिर सवाल उठाया कि जिन कार्यक्रमों के लिए मौखिक आदेश दिए गए थे, उनका भुगतान कब तक होगा। इस पर मंत्री ने कहा कि मौखिक आदेश का कोई रिकॉर्ड नहीं होता।
मंत्री के इस जवाब पर उसेंडी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके पास कई कार्यक्रमों के दस्तावेज मौजूद हैं, जो मौखिक आदेश के आधार पर आयोजित हुए लेकिन उनका भुगतान अब तक नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग द्वारा सदन में गलत जानकारी दी जा रही है।
विधायक उसेंडी ने सदन को यह भी याद दिलाया कि पिछले विधानसभा सत्र में भी यही सवाल उठाया गया था, तब स्वास्थ्य मंत्री ने एक महीने के भीतर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, लेकिन करीब 9 महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि विभाग केवल लिखित भुगतान की जानकारी दे रहा है और मौखिक आदेश से हुए कार्यक्रमों की जानकारी नहीं दे रहा, तो यह सही नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि विभाग द्वारा दी गई गलत जानकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी और ऐसे लोगों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है।
इस दौरान विधायक उमेश पटेल ने भी कहा कि विधानसभा में लगातार गलत जानकारी आने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि यदि सदन में सही जानकारी नहीं दी जाएगी तो जवाबदेही की प्रक्रिया प्रभावित होगी।
मामले को गंभीर होते देख विपक्ष के सदस्यों ने सदन में शोर-शराबा भी किया, जिसके बाद अध्यक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री को निर्देश दिया कि वे इस मामले में जिम्मेदारी के साथ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
सदन में उठे इस मुद्दे के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई सदस्यों का मानना है कि यदि विभागीय जवाब और वास्तविक स्थिति में अंतर है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि तथ्य स्पष्ट हो सकें और जिम्मेदारी तय की जा सके।