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नेपाल की सत्ता में युवा तूफान! बालेन शाह पर टिकी सबकी नजर

Raw File | 06 Mar 2026 | विश्व

काठमांडू। नेपाल की राजनीति इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। पारंपरिक राजनीतिक दलों के खिलाफ बढ़ते जन असंतोष और युवाओं की नई राजनीतिक चेतना के बीच काठमांडू के मेयर रह चुके युवा नेता बालेन शाह तेजी से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में उभरकर सामने आए हैं। 35 वर्षीय बालेन शाह को नेपाल के अगले प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इंजीनियर, रैपर और स्वतंत्र छवि वाले नेता के रूप में पहचान बना चुके शाह ने कम समय में युवाओं के बीच बड़ी लोकप्रियता हासिल की है और पारंपरिक राजनीति को खुली चुनौती दी है।
नेपाल में हुए हालिया संसदीय चुनावों को कई राजनीतिक विश्लेषक “पीढ़ी परिवर्तन का चुनाव” बता रहे हैं। देश की 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के लिए हुए इस चुनाव में करीब 1.9 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया और लगभग 60 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन चुनावों के नतीजे ही नेपाल की नई सरकार और प्रधानमंत्री का रास्ता तय करेंगे। शुरुआती रुझानों में बालेन शाह से जुड़ा राजनीतिक समूह कई सीटों पर प्रभावी प्रदर्शन करता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे उनकी दावेदारी को और मजबूती मिलती नजर आ रही है।
बालेन शाह का असली नाम बालेंद्र शाह है। उनका जन्म 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में हुआ। पेशे से वे एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं और राजनीति में आने से पहले नेपाली रैप संगीत के जरिए युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बना चुके थे। वर्ष 2022 में उन्होंने किसी बड़े दल के समर्थन के बिना निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीतकर पूरे नेपाल की राजनीति को चौंका दिया था। मेयर के रूप में उनके सख्त प्रशासनिक फैसलों, अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।
2026 के आम चुनाव से पहले बालेन शाह ने स्थानीय राजनीति से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता बढ़ाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल में पिछले कुछ वर्षों से चल रही राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार के आरोप और पारंपरिक दलों के प्रति बढ़ती नाराजगी ने नए नेतृत्व के लिए जमीन तैयार कर दी है। इसी माहौल में बालेन शाह का उभार नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
नेपाल की राजनीति लंबे समय से कुछ प्रमुख दलों और नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इनमें Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) के नेता केपी शर्मा ओली, Communist Party of Nepal (Maoist Centre) के नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड और Nepali Congress के नेता शेर बहादुर देउबा जैसे दिग्गज वर्षों से सत्ता की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। लेकिन इस बार के चुनाव में यह संकेत मिल रहे हैं कि नेपाल की जनता पारंपरिक नेतृत्व से हटकर नए और युवा चेहरे को मौका देने के मूड में है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बालेन शाह के नेतृत्व वाले राजनीतिक समूह को पर्याप्त समर्थन मिल जाता है तो नेपाल को अपने इतिहास का सबसे युवा प्रधानमंत्री मिल सकता है। हालांकि नेपाल की संसदीय व्यवस्था में सरकार गठन के लिए गठबंधन की राजनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए अंतिम फैसला चुनाव परिणामों और दलों के बीच बनने वाले समीकरणों पर निर्भर करेगा।
बालेन शाह का उभार केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके क्षेत्रीय प्रभाव भी हो सकते हैं। भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऐसे में नेपाल में नई राजनीतिक धारा का उभरना आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल पूरे नेपाल की नजर चुनाव परिणामों और संभावित नई सरकार के गठन पर टिकी हुई है। यदि बालेन शाह प्रधानमंत्री पद तक पहुंचते हैं तो इसे नेपाल की राजनीति में एक बड़े पीढ़ीगत परिवर्तन के रूप में देखा जाएगा और यह देश की राजनीतिक व्यवस्था में नई शुरुआत का संकेत माना जाएगा।


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