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हरी झंडी मिलते ही भारत की तरफ मुड़ा रूसी तेल का जहाज।

Raw File | 06 Mar 2026 | राष्ट्र, विश्व

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका से अस्थायी राहत मिल गई है। इस छूट के बाद देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी रूसी तेल की खरीद फिर से बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी रूस से आने वाले कच्चे तेल को अपने उस रिफाइनरी प्लांट में प्रोसेस करने की योजना बना रही है, जहां से घरेलू बाजार के लिए पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन तैयार किए जाते हैं। हालांकि रिलायंस की एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड रिफाइनरी फिलहाल गैर-रूसी कच्चे तेल पर ही काम करती रहेगी।
अमेरिकी रुख में बड़ा बदलाव
रूसी तेल खरीदने की यह छूट अमेरिका की नीति में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहे थे।
पिछले साल रूस से तेल आयात करने वाली भारतीय कंपनियों में रिलायंस सबसे आगे रही थी और कंपनी ने करीब 6 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीदा था।
फिलहाल मिडिल ईस्ट पर निर्भरता
2026 में रूसी तेल की खरीद घटने के बाद रिलायंस की अधिकांश तेल आपूर्ति मिडिल ईस्ट से आ रही है। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक इस साल कंपनी के कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी पिछले साल की तुलना में काफी कम हो गई है।
इसकी एक बड़ी वजह यूरोपीय यूनियन द्वारा रूसी कच्चे तेल से बने पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाया गया प्रतिबंध भी माना जा रहा है।
युद्ध से बढ़ीं तेल की कीमतें
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका असर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि इसी दबाव को कम करने के लिए अमेरिका ने भारत को यह अस्थायी छूट दी है।
समुद्र में खड़े हैं लाखों बैरल रूसी तेल
डेटा के अनुसार फिलहाल लगभग 1.5 करोड़ बैरल रूसी तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में टैंकरों पर मौजूद है, जबकि करीब 70 लाख बैरल तेल सिंगापुर के पास जहाजों में लोड है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर भारतीय रिफाइनरियां तेजी से रूसी तेल की खरीद बढ़ा सकती हैं।


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