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महिलाओं के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी। 11 करोड़ का हॉस्टल बंद, नए हॉस्टल के लिए 40 करोड़ खर्च की तैयारी।

Raw File | 09 Mar 2026 | छत्तीसगढ़, प्रदेश

रायपुर में कामकाजी महिलाओं के लिए बनाया गया करीब 11 करोड़ रुपये का आधुनिक छात्रावास छह साल बाद भी खाली पड़ा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसे शुरू करने की बजाय नगर निगम अब 40 करोड़ रुपये से तीन नए हॉस्टल बनाने की तैयारी कर रहा है।
यह मामला सरकारी योजनाओं में अदूरदर्शिता और करोड़ों रुपये के दुरुपयोग को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

रायपुर। कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और सस्ता आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया करीब 11 करोड़ रुपये का महिला छात्रावास छह साल बाद भी अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाया है। नगर निगम क्षेत्र के फुडहर में 4 एकड़ भूमि पर बनाए गए इस चार मंजिला छात्रावास में 110 कमरे हैं और यहां लगभग 230 महिलाओं के रहने की क्षमता है, लेकिन आज तक कामकाजी महिलाओं को इसकी सुविधा नहीं मिल सकी।
यह भवन 2018 में करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था और 2020 में इसे नगर निगम को हैंडओवर कर दिया गया। भवन में बड़े हॉल, किचन, कॉमन एरिया सहित कई सुविधाएं तैयार की गई हैं। प्रत्येक कमरे में दो बेड, अलमारी और अटैच टॉयलेट की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद छह साल बीत जाने के बाद भी छात्रावास का संचालन शुरू नहीं हो पाया।
कोविड-19 महामारी के दौरान इस भवन का उपयोग क्वारंटाइन सेंटर के रूप में किया गया था। इसके बाद इसे समाज कल्याण विभाग को सौंप दिया गया, जहां वर्तमान में एक संस्था द्वारा निशुल्क प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराई जा रही है। यहां लगभग 110 छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन संस्था द्वारा रहने की सुविधा सीमित रूप से दी जा रही है। यानी जिस उद्देश्य से यह छात्रावास बनाया गया था, वह उद्देश्य आज भी अधूरा है।
हैरानी की बात यह है कि भवन के उपयोग में नहीं आने के बावजूद नगर निगम इसकी सुरक्षा और साफ-सफाई पर हर महीने लगभग 1 लाख रुपये खर्च कर रहा है। इसके बावजूद शहर की कामकाजी महिलाओं को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से बना 250 बेड क्षमता वाला छात्रावास उपयोग में नहीं लाया जा सका, तो फिर नगर निगम करीब 40 करोड़ रुपये से तीन नए महिला हॉस्टल बनाने की तैयारी क्यों कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम द्वारा शहर के तीन स्थानों पर नए महिला हॉस्टल बनाने की योजना तैयार की जा रही है। इनमें रेलवे स्टेशन के समीप समता कॉलोनी के पास लगभग 16 करोड़ 11 लाख 35 हजार 488 रुपये की लागत से वर्किंग वुमन हॉस्टल, पंडरी पुराने बस स्टैंड (फूड कॉर्नर के पास) लगभग 12 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये की लागत से हॉस्टल, और नरैया तालाब के पास टिकरा पारा क्षेत्र में करीब 12 करोड़ 44 लाख रुपये की लागत से हॉस्टल निर्माण का प्रस्ताव शामिल है। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर 40 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।
ऐसे में यह मामला प्रशासनिक अदूरदर्शिता और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर 11 करोड़ रुपये की लागत से बना चार मंजिला आधुनिक छात्रावास छह साल से बेकार पड़ा है, दूसरी ओर नए हॉस्टल के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने की तैयारी की जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि शहर में कामकाजी महिलाओं के लिए आवास की जरूरत थी तो पहले से बने छात्रावास को व्यवस्थित तरीके से शुरू क्यों नहीं किया गया।
यह स्थिति न केवल योजना निर्माण और क्रियान्वयन की गंभीर कमी को दर्शाती है बल्कि यह भी संकेत देती है कि योजनाओं के नाम पर करदाताओं के पैसे का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और क्या 11 करोड़ रुपये की लागत से बने इस छात्रावास को उसके मूल उद्देश्य के लिए शुरू किया जाएगा या नहीं।


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