Wednesday | Jul 08, 2026
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खिलाड़ियों के पसीने की कीमत समझते हैं मुख्यमंत्री साय, 8 साल बाद 156 को मिलेगी सरकारी नौकरी!

छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों के सम्मान की नई शुरुआत, राज्य सरकार की संवेदनशील पहल

रायपुर/ किसी भी राज्य की खेल नीति का मूल्यांकन केवल इस बात से नहीं होना चाहिए कि उसने कितने स्टेडियम बनाए या कितनी प्रतियोगिताएं आयोजित कीं। असली कसौटी यह है कि पदक जीतकर लौटने वाले खिलाड़ी के साथ राज्य का व्यवहार कैसा है, उसकी प्रतिभा को कितना सम्मान मिलता है और सक्रिय खेल जीवन के बाद उसके भविष्य की कितनी चिंता की जाती है। इस कसौटी पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम स्वरूप देने का निर्णय महत्वपूर्ण और स्वागतयोग्य है।

वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिए आवेदन करने वाले ये खिलाड़ी लंबे समय से अपने चयन की प्रतीक्षा कर रहे थे। 20 अलग-अलग खेलों से जुड़े 156 खिलाड़ियों की सूची अब सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी गई है और अधिसूचना के बाद उन्हें पात्रता के अनुसार शासकीय सेवा में नियुक्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आठ वर्षों के लंबे इंतजार के बाद लिया गया यह निर्णय केवल एक लंबित प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन खिलाड़ियों और उनके परिवारों के विश्वास को लौटाने की पहल है, जिन्होंने खेल के मैदान में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।

इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव की सराहना इसलिए भी की जानी चाहिए कि उन्होंने खिलाड़ियों को केवल नौकरी देने की दृष्टि से नहीं देखा है बल्कि स्पष्ट सोच रखी है कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों के अनुभव और उपलब्धियों का उपयोग नई खेल प्रतिभाओं के प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और प्रतिभा संवर्धन में किया जाना चाहिए। यह खेल प्रशासन की दृष्टि से दूरदर्शी सोच है। एक अनुभवी खिलाड़ी केवल एक कर्मचारी नहीं होता, वह अपने साथ वर्षों का अभ्यास, अनुशासन, संघर्ष, हार और जीत का अनुभव लेकर आता है। यदि ऐसे खिलाड़ियों को प्रदेश की खेल व्यवस्था से व्यवस्थित रूप से जोड़ा जाए तो वे नई पीढ़ी के लिए प्रशिक्षक और मार्गदर्शक की प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में इस सोच की विशेष आवश्यकता है। प्रदेश के गांवों, आदिवासी अंचलों और छोटे शहरों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। अनेक बच्चों में प्राकृतिक खेल क्षमता होती है, लेकिन सही समय पर पहचान, प्रशिक्षण और संसाधन नहीं मिलने के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाते। कोई प्रतिभाशाली धावक संसाधनों के अभाव में गांव तक सीमित रह जाता है, कोई तीरंदाज आधुनिक उपकरण नहीं मिलने से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाता है और कोई प्रतिभावान खिलाड़ी रोजगार की चिंता में समय से पहले मैदान छोड़ देता है। ऐसी परिस्थितियों में मुख्यमंत्री का यह कहना महत्वपूर्ण है कि सरकार का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को सम्मानित करना नहीं है, बल्कि गांव से राज्य स्तर तक प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर देना है।

मुख्यमंत्री साय की कार्यशैली की एक विशेषता यह दिखाई देती है कि वे पुराने और लंबित विषयों को भी केवल पिछली व्यवस्था की समस्या बताकर छोड़ने के बजाय समाधान की ओर बढ़ाने का प्रयास करते हैं। 156 खिलाड़ियों का मामला वर्षों से प्रतीक्षा में था। आठ वर्ष किसी भी सरकारी प्रक्रिया के लिए लंबा समय है, लेकिन खिलाड़ी के जीवन में यह अवधि और भी महत्वपूर्ण होती है। खेल जीवन की अवधि सीमित होती है। खिलाड़ी अपनी युवावस्था का बड़ा हिस्सा अभ्यास, प्रतियोगिता और प्रदेश के लिए उपलब्धियां हासिल करने में लगा देता है। इसलिए उसकी उपलब्धियों के सम्मान में देरी केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि उसके जीवन और भविष्य को प्रभावित करने वाला विषय बन जाती है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति द्वारा इस प्रक्रिया को अंतिम स्वरूप देना इसलिए एक संवेदनशील निर्णय माना जाना चाहिए।

राज्य में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा से जोड़ने की व्यवस्था पहले से रही है और सरकार के अनुसार अब तक 182 उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जा चुके हैं। लेकिन अब आवश्यकता यह है कि इस व्यवस्था को स्थायी, नियमित और समयबद्ध बनाया जाए। मुख्यमंत्री की वर्तमान पहल को एक व्यापक खेल सुधार की शुरुआत में बदला जा सकता है। सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित कर सकती है जिसमें उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची हर वर्ष निर्धारित समय पर जारी हो और चयन से नियुक्ति तक की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय हो। इससे भविष्य में किसी खिलाड़ी को वर्षों तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।

सरकार के लिए एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है खिलाड़ियों को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप जिम्मेदारी देना। सरकारी नौकरी पाने वाले उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सामान्य प्रशासनिक कार्यों तक सीमित करने के बजाय खेल अकादमियों, स्कूलों, प्रशिक्षण केंद्रों और प्रतिभा खोज कार्यक्रमों से जोड़ा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्वयं इस दिशा में सोच व्यक्त की है। यदि इसे नीति का स्वरूप दिया गया तो एक तरफ खिलाड़ियों को सम्मानजनक रोजगार मिलेगा और दूसरी तरफ प्रदेश को अनुभवी प्रशिक्षकों तथा मार्गदर्शकों की एक मजबूत पीढ़ी मिल सकती है।

छत्तीसगढ़ में खेलों के विकास के लिए अब एक समन्वित मॉडल की आवश्यकता है। गांव और ब्लॉक स्तर पर प्रतिभा खोज, जिला स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, संभाग स्तर पर आधुनिक खेल सुविधाएं और राज्य स्तर पर उच्च प्रदर्शन केंद्र विकसित किए जाने चाहिए। आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों में सफलता केवल मेहनत से संभव नहीं है। आधुनिक प्रशिक्षण के साथ पोषण, स्पोर्ट्स साइंस, फिजियोथेरेपी, चोट प्रबंधन, मानसिक प्रशिक्षण और उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं का अनुभव भी आवश्यक है। यदि साय सरकार इस दिशा में एकीकृत व्यवस्था खड़ी करती है तो छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को नई ऊंचाई मिल सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खेल अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं और नई खेल अकादमियों की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। उनकी यह सोच सही दिशा में है। खेलों में निवेश केवल पदक प्राप्त करने के लिए नहीं होता। खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाशाली युवाओं के लिए जीवन बदलने का माध्यम बन सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक सकारात्मक संदेश दिया है कि खिलाड़ी केवल पदक जीतने तक सरकार की प्राथमिकता नहीं हैं, बल्कि उनके भविष्य और अनुभव की भी राज्य को आवश्यकता है। यही सोच छत्तीसगढ़ में मजबूत खेल संस्कृति की नींव बन सकती है। यदि प्रतिभा की समय पर पहचान हो, प्रशिक्षण आधुनिक हो, संसाधन पर्याप्त हों और खिलाड़ी को अपने भविष्य की चिंता से मुक्ति मिले तो प्रदेश की खेल प्रतिभाएं बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की क्षमता रखती हैं।

156 खिलाड़ियों के वर्षों पुराने इंतजार को समाप्त करने की दिशा में उठाया गया कदम संवेदनशील शासन की पहचान है। मुख्यमंत्री साय ने खिलाड़ियों की उम्मीद को फिर जीवित किया है। अब उनकी खेल संबंधी सोच को एक स्थायी और मजबूत व्यवस्था में बदलने की आवश्यकता है, ताकि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का कोई प्रतिभाशाली खिलाड़ी संसाधनों के अभाव में मैदान न छोड़े और किसी पदक विजेता को अपने भविष्य के लिए वर्षों तक सरकारी फाइलों की ओर न देखना पड़े।

खिलाड़ियों को सम्मान देना केवल पुरस्कार देना नहीं है बल्कि उनके संघर्ष के बाद उनका भविष्य सुरक्षित करना भी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह पहल इसी सोच की ओर बढ़ता हुआ एक सराहनीय कदम है। यदि यह दृष्टि निरंतरता के साथ आगे बढ़ती रही, तो छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों दोनों का भविष्य निश्चित रूप से अधिक मजबूत और सुरक्षित होगा।
(देवेंद्र किशोर गुप्ता)


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