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जब सिलेंडर के लिए लगती थी लाइन…अटल सरकार से शुरू हुआ घर-घर गैस का सफर

Raw File | 13 Mar 2026 | राष्ट्र

रायपुर/ भारत में रसोई गैस का सफर चूल्हे के धुएँ से शुरू होकर घर-घर गैस सिलेंडर तक पहुंचने की एक लंबी कहानी है। आजादी के बाद कई दशकों तक देश के अधिकांश घरों में लकड़ी, कोयला और गोबर के चूल्हों पर खाना बनता था, जिससे महिलाओं और बच्चों को धुएँ से होने वाली गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता था। भारत में एलपीजी गैस की शुरुआत 1955 के आसपास हुई और बाद में सरकारी तेल कंपनियों ने इसका वितरण शुरू किया। लेकिन लंबे समय तक यह सुविधा सीमित शहरों और संपन्न परिवारों तक ही सीमित रही। 1960 और 1970 के दशक में गैस कनेक्शन मिलना आसान नहीं था। एजेंसियाँ कम थीं और सिलेंडर की सप्लाई भी सीमित रहती थी। इसलिए लोगों को गैस के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ता था और कई जगह सिफारिश या राजनीतिक प्रभाव से कनेक्शन मिलने की चर्चाएँ भी होती थीं।

1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद गैस वितरण व्यवस्था में कुछ सुधार शुरू हुए,सांसदों को गैस सिलेंडर का कोटा दिया जाता रहा। लेकिन वास्तविक विस्तार का दौर तब तेज हुआ जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई जी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल (1998–2004) में गैस वितरण नेटवर्क को मजबूत करने, नई गैस एजेंसियाँ खोलने और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया, जिससे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ छोटे शहरों तक भी एलपीजी की पहुंच बढ़ने लगी। इसके बाद के वर्षों में गैस सब्सिडी और वितरण व्यवस्था में सुधार की कोशिशें जारी रहीं, लेकिन देश के करोड़ों गरीब परिवार अभी भी चूल्हे के धुएँ में खाना बनाने को मजबूर थे।
2014 के बाद केंद्र में भाजपा सरकार बनने पर रसोई गैस को घर-घर पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया और 2016 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की गई, जिसके तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए। इस योजना के माध्यम से करोड़ों नए गैस कनेक्शन जारी किए गए और पहली बार बड़ी संख्या में ग्रामीण और गरीब परिवारों तक एलपीजी पहुंची। आज स्थिति यह है कि गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइन लगाने का दौर लगभग खत्म हो चुका है। ऑनलाइन बुकिंग और होम डिलीवरी जैसी सुविधाओं के कारण सिलेंडर सीधे घर तक पहुंच रहा है। इस तरह भारत में रसोई गैस का सफर कई दशकों की नीतियों और प्रयासों का परिणाम है, जिसमें बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की भूमिका और गरीब परिवारों तक गैस पहुंचाने में बाद की भाजपा सरकार की योजनाएँ महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती हैं।


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