रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF (District Mineral Foundation) फंड से जुड़े एक और गंभीर मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। कोरबा जिले के तत्कालीन कलेक्टर एवं IAS अधिकारी अब्दुल केशर हक पर DMF कोरबा के खाते से ₹25 करोड़ की कथित फर्जी बैंक एंट्री कराने का आरोप लगा है।केसर हक वर्तमान में पीएचई विभाग के सचिव है।
इस संबंध में भारत सरकार के खान मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को मामले की तथ्यात्मक, वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच कराने के निर्देश दिए है।
खान मंत्रालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने 09 दिसंबर 2025 को केंद्रीय खान मंत्री एवं खान सचिव को शिकायत भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2018-19 के दौरान, जब केशर हक कोरबा के कलेक्टर पद पर पदस्थ थे, तब DMF कोरबा के बैंक खाते से ₹25 करोड़ की राशि का फर्जी तरीके से हस्तांतरण दर्शाया गया।

शिकायत के अनुसार,18 सितंबर 2018 को भारतीय स्टेट बैंक, आईटीआई कॉलोनी शाखा, कोरबा में स्थित DMF कोरबा के खाता क्रमांक 35426068489 से यह राशि CIPET (Central Institute of Petrochemicals Engineering & Technology) के खाते में ट्रांसफर दिखाई गई थी।
इस मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत 20 नवंबर 2024 को CIPET द्वारा दिए गए जवाब में यह स्पष्ट किया गया कि—01 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 की अवधि के दौरान DMF कोरबा से CIPET को किसी भी प्रकार की राशि प्राप्त नहीं हुई। RTI के इस जवाब के बाद शिकायतकर्ता ने पूरे भुगतान को फर्जी बैंक एंट्री और कागजी लेन-देन बताते हुए गंभीर आरोप लगाए है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 27 दिसंबर 2025 को भारत सरकार, खान मंत्रालय (शास्त्री भवन, नई दिल्ली) से पत्र जारी किया गया। पत्र क्रमांक 7/56/2022 में छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव से कहा गया है कि पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कराई जाए तथा वित्तीय व प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा की जाए।जांच के बाद की गई कार्रवाई एवं रिपोर्ट खान मंत्रालय को अवगत कराई जाए।
आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ में DMF फंड पहले से ही बड़े घोटालों को लेकर चर्चा में रहा है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बने इस फंड में कथित अनियमितताओं के चलते पहले भी राज्य के कई IAS अधिकारी जेल जा चुके हैं और ED, EOW व ACB जैसी एजेंसियां जांच कर चुकी हैं। ऐसे में DMF कोरबा से जुड़े इस नए आरोप ने एक बार फिर शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब इस पूरे मामले में नजरें छत्तीसगढ़ शासन की जांच पर टिकी हैं।खान मंत्रालय द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि क्या ₹25 करोड़ का यह भुगतान वास्तव में फर्जी था! जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है,मामला प्रशासनिक जांच तक सीमित रहता है या आपराधिक केस दर्ज होता है।
फिलहाल, DMF फंड से जुड़े इस नए प्रकरण ने राज्य की नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।